भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत और फसलों को किया गया शामिल

भावांतर भरपाई योजना हरियाणा 2019-20 (पंजीयन लिस्ट, आवेदन फॉर्म ऑनलाइन, पात्रता) (Bhavantar Bharpai Yojana Haryana in Hindi) [Online Application Form, Eligibility, List]

हरियाणा सरकार ने भावांतर भरपाई योजना शुरू की थी जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना था. इस योजना के अंतर्गत अभी किसान आलू और फूलगोभी के लिए 30 नवंबर तक अपना पंजीयन करवा सकते हैं. सरकार द्वारा इन सब्जियों के लिए पंजीयन की तिथि आगे बढ़ा दी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा परेशान इस योजना का लाभ ले सकें.

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किसान अपनी सब्जियां सब्जी मंडी में जाकर बेचता था जिससे उसे उसकी मेहनत के मुताबिक पैसा नहीं मिलता था क्योंकि मंडी में सब्जियां बहुत ही कम कीमत पर बिक जाती थी और उसे बहुत घाटा होता था इसलिए भावांतर भरपाई जैसी योजना को शुरू किया गया. इस योजना के अंतर्गत किसान मार्केटिंग बोर्ड की वेबसाइट पर अपनी सब्जी के लिए आवेदन कर सकता है.

इस भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत 6 तरह की सब्जियों को सरकार द्वारा जोड़ा गया है जिसने आलू, प्याज, टमाटर एवं फूलगोभी आदि शामिल है योजना के अंतर्गत किसानों को 48 से 56000 प्रति एकड़ आमदनी कराना है.

योजना के अंतर्गत पंजीयन की शुरुआत  कर दी गई है सभी सब्जियों के लिए विभिन्न प्रकार पंजीयन की अंतिम तिथि तय की गई  है जो इस प्रकार है-

  1. आलू 15 सितंबर से 30 नवंबर
  2. प्याज 15 दिसंबर से 15 फरवरी
  3. फूलगोभी 15 सितंबर से 30 नवंबर
  4. टमाटर 15 दिसंबर से 15 फरवरी

भावांतर भरपाई योजना अंतर्गत सरकार द्वारा नहीं सब्जियों को शामिल किया गया है जिसमें मटर, गाजर, बैंगन, अमरूद, कीनुआ एवं शिमला मिर्च शामिल है , हालांकि इस वर्ष इन सब्जियों के लिए किसानों को कोई लाभ प्राप्त नहीं  होगा. सब्जियों के लिए अगले वर्ष पंजीयन शुरू हो सकता है.

इस योजनाओं के भीतर पंजीयन की शुरुआत कर दी गई है, पिछले वर्ष से इस वर्ष में 100 रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी भी सरकार द्वारा की गई है ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके.

इस तरह की योजना मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही थी जिसका नाम भावांतर भुगतान योजना था. इस योजना के अंतर्गत फसलों को शामिल किया गया था और किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाना. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना था. यह दोनों ही योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई हैं अगर यह सफल होती हैं तो उन्हें पुरे देश में शुरू किया जा सकता हैं ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके.

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