कुपोषण को दूर करने के लिए राजस्थान सरकार ने शुरू किया इंदिरा गांधी मातृ पावन योजना का पायलट प्रोजेक्ट

इंदिरा गांधी मातृ पावन योजना (Indira Gandhi Matritva Sahyog Yojana)

राजस्थान राज्य में महिलाओं और बच्चों के कुपोषण के उच्च स्तर से निपटने के अपने प्रयासों को मजबूत करते हुए राजस्थान सरकार ने चार आदिवासी जिलों में ‘इंदिरा गांधी मातृ पावन योजना’ के लाभ को बढ़ाने का फैसला किया है. इसके लिए शुरुआत में ये 4 आदिवासी जिले बांसवाडा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर हैं जिनमें इस योजना को लागू किया जा रहा है. ये सभी आदिवासी ऐसे जिले हैं जहां पर सबसे अधिक कुपोषण के मरीज होते हैं. उनमें पोषण संबंधी संकेतक जैसे मातृ बीएमआई और एनीमिया या बच्चों में स्टंटिंग, वास्टिंग और कम वजन का होना आदि देखने को मिलता है. 

Indira Gandhi Matritva Sahyog Yojana

बताया जा रहा है कि राजस्थान की इस पायलट योजना के तहत इन चार जिलों बांसवाडा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर में दूसरे बच्चे की उम्मीद करने वाली महिलाओं के आहार में आयरन और प्रोटीन के लो लेवल पर होने वाली चिंताओं को दूर करने के लिए उनकी वित्तीय रूप से मदद किये जाने का फैसला किया गया है.

इस योजना को लागू करते हुए यह कहा जा रहा है कि राज्य सरकार के द्वारा गर्भवती महिलाओं को उनके दूसरे बच्चे की उम्मीद करने पर उन्हें 6 हजार रूपये प्रदान किये जा रहे हैं. आपको बता दें कि भारत सरकार वर्तमान में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार गर्भवती होने वाली महिलाओं को 5000 रूपये प्रदान करती है. लेकिन यह नई योजना उन महिलाओं को 6000 रूपये प्रदान करेगी जो दूसरी बार बच्चे को जन्म देने के लिए भी होंगे.

अतः उच्च लाभ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के खंड 4 बी के तहत यह प्रावधान किया गया है, कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं यानि कि डिलीवरी के 6 महीने बाद तक महिलायें 6000 रूपये का मातृत्व लाभ प्राप्त करने की हकदार होंगी. इस योजना को शुरू करने का सरकार का मुख्य उद्देश्य दूसरे बच्चे के आने से एक गरीब परिवार के सामने आने वाली कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास करना है.

इस योजना से 4 जिलों में दूसरी बार गर्भवती होने वाली महिलाओं के लिए यह लाभ लगभग 70 % तक बढ़ जायेगा. साथ ही इस योजना से 5 साल में 4 जिलों की लगभग 3.5 लाख महिलाएं लाभान्वित होंगी. हालांकि इस योजना में उन परिवार की महिलाओं को लाभ नहीं दिया जायेगा जिनके 2 से अधिक बच्चे हैं, अर्थात यह योजना के केवल 2 बच्चों तक के लिए ही सीमित है. 

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