किसानों के लिए खुशखबरी – सरकार ने फसल बीमा योजना में किये बड़े बदलाव

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किये गए बदलाव (Changes in PM Fasal Bima Yojana in Hindi)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मोदी सरकार द्वारा सन 2016 में शुरू किया गया था. जिसके तहत किसानों को उनकी फसल के लिए बीमा प्रदान किया जाता है, जब उनकी फसल किसी प्राकृतिक आपदा का शिकार हो जाती हैं. इसमें किसानों को कुछ प्रीमियम भरना होता हैं और उसके बदले में उन्हें बीमा राशि प्रदान की जाती हैं. किन्तु पिछले कुछ समय से देखा जा रहा हैं कि इस योजना में काफी सारी खामियां नजर आ रही हैं. उन खामियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इस योजना में कुछ संशोधन करने का फैसला किया गया हैं जिसकी मंजूरी भी दे दी गई है.

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इस योजना में किये गये बदलाव की बात करें तो इसमें सबसे अहम बदलाव यह किया गया हैं कि अब यह योजना किसानों के लिए स्वैच्छिक की जा रही हैं. यानि कि अब किसानों को यह अधिकार दिया जा रहा हैं कि वे यह फैसला खुद से लें कि उन्हें बीमा योजना में शामिल होना हैं या नहीं. इसके अलावा बीमा कंपनियों के लिए व्यवसाय की सीमा को 3 साल तय किया जा रहा है. और इसमें केंद्र या राज्य सरकार को यह विकल्प दिया जा रहा हैं कि वे फाइनेंस के स्केल को चुनें.

इसके अलावा इस योजना में किये जाने वाले बदलाव में अब सबसे अहम प्रीमियम सब्सिडी की बात करते हैं. अब तक केंद्र एवं राज्य सरकार को 50 – 50 % प्रीमियम का भुगतान करना होता था, किन्तु अब इसमें भी काफी बदलाव किये गये हैं. ऐसे राज्य जोकि उत्तरपूर्वी क्षेत्र के हैं उनमें केंद्र के हिस्से को बढ़ा दिया गया हैं. यानि अब केंद्र का प्रीमियम में योगदान 90 % होगा, जबकि राज्य सरकार को केवल 10 % देना होगा. इसके अलावा बाकी के क्षेत्रों में यह बदलाव हुआ हैं कि जो सिंचित क्षेत्र हैं वहां केंद्र सरकार 25 % प्रीमियम भरेगी और जो असिंचित क्षेत्र हैं, वहां 30 % का प्रीमियम राशि का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा.

इस योजना में किये जाने वाले ये बदलाव खरीफ सीजन साल 2020 से पूरे देश में लागू किये जायेंगे. ये बदलाव कृषि के उत्पादन में होने वाले जोखिमों को कम करने एवं खेती की आय को स्थिर करने के उद्देश्य के साथ किये गये हैं.

आपको बता दें कि इस योजना के शुरू होने के 1 साल बाद ही यह देखा गया कि अधिकतर किसान इस फसल बीमा योजना का पात्र बनने से पीछे हट गए हैं. इसका कारण मुख्य रूप से यह हैं कि किसानों से प्रीमियम तो पूरा वसूला जाता था, किन्तु उन्हें बीमा राशि पूरी प्रदान नहीं की जाती थी. और इसके अलावा भी इसमें कई तरह की खामियां के चलते इस योजना में बदलाव किये गये है, अब यह योजना नए सिरे से शुरू होकर किसानों को लाभ पहुंचाएगी, ऐसी उम्मीद की जा रही हैं.

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